HCV Salmi Capitolo 103

Salmi 103

HCV · Confronta · Audio

1ेरे प्राण, याहवेह का स्तवन करो; 2मेरे प्राण, याहवेह का स्तवन करो, 3वह तेरे सब अपराध क्षमा करते 4वही तेरे जीवन को गड्ढे से छुड़ा लेते हैं 5वह तेरी अभिलाषाओं को मात्र उत्कृष्ट वस्तुओं से ही तृप्‍त करते हैं, 6याहवेह सभी दुःखितों के निमित्त धर्म 7उन्होंने मोशेह को अपनी नीति स्पष्ट की, 8याहवेह करुणामय, कृपानिधान, 9वह हम पर निरंतर आरोप नहीं लगाते रहेंगे, 10उन्होंने हमें न तो हमारे अपराधों के लिए निर्धारित दंड दिया 11क्योंकि आकाश पृथ्वी से जितना ऊपर है, 12पूर्व और पश्चिम के मध्य जितनी दूरी है, 13जैसे पिता की मनोहरता उसकी संतान पर होती है, 14क्योंकि उन्हें हमारी सृष्टि ज्ञात है, 15मनुष्य से संबंधित बातें यह है, कि उसका जीवन घास समान है, 16उस पर उष्ण हवा का प्रवाह होता है और वह नष्ट हो जाता है, 17किंतु याहवेह का करुणा-प्रेम उनके श्रद्धालुओं 18जो उनकी वाचा का पालन करते 19याहवेह ने अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थापित किया है, 20तुम, जो उनके स्वर्गदूत हो, याहवेह का स्तवन करो, 21स्वर्ग की संपूर्ण सेना और तुम, जो उनके सेवक हो, 22उनकी समस्त सृष्टि, जो समस्त रचना में व्याप्‍त हैं,

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