URD Zsoltárok Fejezet 40

Zsoltárok 40

URD · Összevetés · Hang

1ैंने सब्र से ख़ुदावन्द पर उम्मीद रख्खी 2उसने मुझे हौलनाक गढ़े 3उसने हमारे ख़ुदा की सिताइश का नया हम्द मेरे मुँह में डाला। 4मुबारक है वह आदमी, 5ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा! जो 'अजीब काम तूने किए, 6क़ुर्बानी और नज़्र को तू पसंद नहीं करता, 7तब मैंने कहा, “देख! मैं आया हूँ। 8ऐ मेरे ख़ुदा, मेरी ख़ुशी तेरी मर्ज़ी पूरी करने में है; 9मैंने बड़े मजमे' में सदाक़त की बशारत दी है; 10मैंने तेरी सदाक़त अपने दिल में छिपा नहीं रखी; 11ऐ ख़ुदावन्द! तू मुझ पर रहम करने में दरेग़ न कर; 12क्यूँकि बेशुमार बुराइयों ने मुझे घेर लिया है; 13ऐ ख़ुदावन्द! मेहरबानी करके मुझे छुड़ा। 14जो मेरी जान को हलाक करने के दर पै हैं, 15जो मुझ पर अहा हा हा करते हैं, 16तेरे सब तालिब तुझ में ख़ुश — ओ — खुर्रम हों; 17लेकिन मैं ग़रीब और मोहताज हूँ,

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