Psalmi 68
1परमेश्वर उठे, उसके शत्रु तितर-बितर हों; 2जैसे धुआँ उड़ जाता है, वैसे ही तू उनको उड़ा दे; 3परन्तु धर्मी आनन्दित हों; वे परमेश्वर के सामने प्रफुल्लित हों; 4परमेश्वर का गीत गाओ, उसके नाम का भजन गाओ; 5परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, विधवाओं का न्यायी है। 68:5 विधवाओं का न्यायी है: वह सुनिश्चित करता है कि उनके साथ अन्याय न हो। वह उन्हें अत्याचार और अन्याय से बचाता है। 6परमेश्वर अनाथों का घर बसाता है; 7हे परमेश्वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे-आगे चलता था, (सेला) 8तब पृथ्वी काँप उठी, (इब्रा. 12:26, न्या. 5:4,5) 9हे परमेश्वर, तूने बहुतायत की वर्षा की; 10तेरा झुण्ड उसमें बसने लगा; 11प्रभु आज्ञा देता है, 12अपनी-अपनी सेना समेत राजा भागे चले जाते हैं, 13क्या तुम भेड़शालाओं के बीच लेट जाओगे? 14जब सर्वशक्तिमान ने उसमें राजाओं को तितर-बितर किया, 15बाशान का पहाड़ परमेश्वर का पहाड़ है; 16परन्तु हे शिखरवाले पहाड़ों, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, 17परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन् हजारों हजार हैं; 18तू ऊँचे पर चढ़ा, तू लोगों को बँधुवाई में ले गया; (इफि. 4:8) 19धन्य है प्रभु, जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है; (सेला) 20वही हमारे लिये बचानेवाला परमेश्वर ठहरा; यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है। 68:20 यहोवा प्रभु मृत्यु से भी बचाता है: अर्थात् एकमात्र वही है जो मृत्यु से बचा सकता है। 21निश्चय परमेश्वर अपने शत्रुओं के सिर पर, 22प्रभु ने कहा है, “मैं उन्हें बाशान से निकाल लाऊँगा, 23कि तू अपने पाँव को लहू में डुबोए, 24हे परमेश्वर तेरी शोभा-यात्राएँ देखी गई, 25गानेवाले आगे-आगे और तारवाले बाजों के बजानेवाले पीछे-पीछे गए, 26सभाओं में परमेश्वर का, 27पहला बिन्यामीन जो सबसे छोटा गोत्र है, 28तेरे परमेश्वर ने तेरी सामर्थ्य को बनाया है, 29तेरे मन्दिर के कारण जो यरूशलेम में हैं, 30नरकटों में रहनेवाले जंगली पशुओं को, 31मिस्र से अधिकारी आएँगे; 32हे पृथ्वी पर के राज्य-राज्य के लोगों परमेश्वर का गीत गाओ; (सेला) 33जो सबसे ऊँचे सनातन स्वर्ग में सवार होकर चलता है; 34परमेश्वर की सामर्थ्य की स्तुति करो, 68:34 परमेश्वर की सामर्थ्य की स्तुति करो: अर्थात् उसे सामर्थ्य सम्पन्न परमेश्वर मानो। अपनी आराधना में उसकी सर्वशक्ति को स्वीकार करो। 35हे परमेश्वर, तू अपने पवित्रस्थानों में भययोग्य है,