URD Hohelied Kapitel 6

Hohelied 6

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1ेरा महबूब कहाँ गया ऐ 'औरतों में सब से जमीला? 2मेरा महबूब अपने बोस्तान में बलसान की क्यारियों की तरफ़ गया है, 3मैं अपने महबूब की हूँ और मेरा महबूब मेरा है। 4ऐ मेरी प्यारी, तू तिर्ज़ा की तरह खू़बसूरत है। 5अपनी आँखें मेरी तरफ़ से फेर ले, 6तेरे दाँत भेड़ों के गल्ले की तरह हैं, 7तेरी कनपटियाँ तेरे नक़ाब के नीचे, 8साठ रानियाँ और अस्सी हरमें, 9लेकिन मेरी कबूतरी, मेरी पाकीज़ा बेमिसाल है; 10यह कौन है जिसका ज़हूर सुबह की तरह है, 11मैं चिलगोज़ों के बाग में गया, 12मुझे अभी ख़बर भी न थी कि मेरे दिल ने मुझे मेरे उमरा के रथों पर चढ़ा दिया। 13लौट आ, लौट आ, ऐ शूलिमीत!

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