HCV Psalmen Kapitel 41

Psalmen 41

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1न्य है वह मनुष्य, जो दरिद्र एवं दुर्बल की सुधि लेता है; 2याहवेह उसे सुरक्षा प्रदान कर उसके जीवन की रक्षा करेंगे. 3रोगशय्या पर याहवेह उसे संभालते रहेंगे, 4मैंने पुकारा, “याहवेह, मुझ पर कृपा कीजिए; 5बुराई भाव में मेरे शत्रु मेरे विषय में कामना करते हैं, 6जब कभी उनमें से कोई मुझसे भेंट करने आता है, 7मेरे समस्त शत्रु मिलकर मेरे विरुद्ध में कानाफूसी करते रहते हैं; 8वे कहते हैं, “उसे एक घृणित रोग का संक्रमण हो गया है; 9यहां तक कि जो मेरा परम मित्र था, 10किंतु याहवेह, आप मुझ पर कृपा करें; 11इसलिये कि मेरा शत्रु मुझे नाश न कर सका, 12मेरी सच्चाई के कारण मुझे स्थिर रखते हुए, 13सर्वदा से सर्वदा तक इस्राएल के परमेश्वर,

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