HCV Псалтирь Глава 14

Псалтирь 14

1ूर्ख मन ही मन में कहते हैं, 14:1 मूर्ख स्तोत्र संहिता के मुताबिक वह जिसमें नैतिकता की कमी है 2स्वर्ग से याहवेह 3सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्‍ट हो चुके हैं; 4मेरी प्रजा के ये भक्षक, ये दुष्ट पुरुष, क्या ऐसे निर्बुद्धि हैं? 5वहां वे अत्यंत घबरा गये हैं, 6तुम दुःखित को लज्जित करने की युक्ति कर रहे हो, 7कैसा उत्तम होता यदि इस्राएल का उद्धार ज़ियोन से प्रगट होता!

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