HCV Psalm Kapittel 129

Psalm 129

HCV · Sammenlign · Lyd

1मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं,” 2“मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं, 3हल चलानेवालों ने मेरे पीठ पर हल चलाया है, 4किंतु याहवेह युक्त है; 5वे सभी, जिन्हें ज़ियोन से बैर है, 6उनकी नियति भी वही हो, जो घर की छत पर उग आई घास की होती है, 7किसी के हाथों में कुछ भी नहीं आता, 8आते जाते पुरुष यह कभी न कह पाएं,

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