Siralmak 2
1यहोवा ने सिय्योन की पुत्री को किस प्रकार अपने कोप के बादलों से ढाँप दिया है! 2यहोवा ने याकूब की सब बस्तियों को निष्ठुरता से नष्ट किया है; 3उसने क्रोध में आकर इस्राएल के सींग को जड़ से काट डाला है; 2:3 सींग को जड़ से काट डाला है: सींग शक्ति का प्रतीक है। सींग को जड़ से काट देने का अर्थ है पूर्णतः शक्तिहीन कर देना- इस्राएल को। 4उसने शत्रु बनकर धनुष चढ़ाया, और बैरी बनकर दाहिना हाथ बढ़ाए हुए खड़ा है; 5यहोवा शत्रु बन गया, उसने इस्राएल को निगल लिया; 6उसने अपना मण्डप बारी के मचान के समान अचानक गिरा दिया, 7यहोवा ने अपनी वेदी मन से उतार दी, 8यहोवा ने सिय्योन की कुमारी की शहरपनाह तोड़ डालने की ठानी थी: 9उसके फाटक भूमि में धस गए हैं, उनके बेंड़ों को उसने तोड़कर नाश किया। 10सिय्योन की पुत्री के पुरनिये भूमि पर चुपचाप बैठे हैं; 11मेरी आँखें आँसू बहाते-बहाते धुँधली पड़ गई हैं; 12वे अपनी-अपनी माता से रोकर कहते हैं, 13हे यरूशलेम की पुत्री, मैं तुझ से क्या कहूँ? 14तेरे भविष्यद्वक्ताओं ने दर्शन का दावा करके तुझ से व्यर्थ और मूर्खता की बातें कही हैं; 15सब बटोही तुझ पर ताली बजाते हैं; (मत्ती 27:39) 16तेरे सब शत्रुओं ने तुझ पर मुँह पसारा है, 17यहोवा ने जो कुछ ठाना था वही किया भी है, वचन वह प्राचीनकाल से कहता आया है वही उसने पूरा भी किया है; 2:17 वचन .... पूरा भी किया है: या जो उसने ठान लिया या वह पूरा किया है। सिय्योन का विनाश परमेश्वर के संकल्प की पूर्ति है जिसकी उन्हें पहले से प्राचीनकाल से चेतावनी दी गई थी। 18वे प्रभु की ओर तन मन से पुकारते हैं! 19रात के हर पहर के आरम्भ में उठकर चिल्लाया कर! 20हे यहोवा दृष्टि कर, और ध्यान से देख कि तूने यह सब दुःख किसको दिया है? 21सड़कों में लड़के और बूढ़े दोनों भूमि पर पड़े हैं; 22तूने मेरे भय के कारणों को नियत पर्व की भीड़ के समान चारों ओर से बुलाया है;