HCV Zsoltárok Fejezet 89

Zsoltárok 89

HCV · Összevetés · Hang

1ैं याहवेह के करुणा-प्रेम का सदा गुणगान करूंगा; 2मेरी उद्घोषणा होगी कि आपका करुणा-प्रेम सदा-सर्वदा अटल होगी, 3आपने कहा, “मैंने अपने चुने हुए के साथ एक वाचा स्थापित की है, 4‘मैं तुम्हारे वंश को युगानुयुग अटल रखूंगा. 5याहवेह, स्वर्ग मंडल आपके अद्भुत कार्यों का गुणगान करता है. 6स्वर्ग में कौन याहवेह के तुल्य हो सकता है? 7जब सात्विक एकत्र होते हैं, वहां परमेश्वर के प्रति गहन श्रद्धा व्याप्‍त होता है; 8याहवेह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, कौन है आपके समान सर्वशक्तिमान याहवेह? 9उमड़ता सागर आपके नियंत्रण में है; 10आपने ही विकराल जल जंतु रहब को ऐसे कुचल डाला मानो वह एक खोखला शव हो; 11स्वर्ग के स्वामी आप हैं तथा पृथ्वी भी आपकी ही है; 12उत्तर दिशा आपकी रचना है और दक्षिण दिशा भी; 13सामर्थ्य आपकी भुजा में व्याप्‍त है; 14धार्मिकता तथा खराई आपके सिंहासन के आधार हैं; 15याहवेह, धन्य होते हैं वे, जिन्होंने आपका जयघोष करना सीख लिया है, 16आपके नाम पर वे दिन भर खुशी मनाते हैं 17क्योंकि आप ही उनके गौरव तथा बल हैं, 18वस्तुतः याहवेह ही हमारी सुरक्षा ढाल हैं, 19वर्षों पूर्व आपने दर्शन में 20मुझे मेरा सेवक, दावीद, मिल गया है; 21मेरा ही हाथ उसे स्थिर रखेगा; 22कोई भी शत्रु उसे पराजित न करेगा; 23उसके देखते-देखते मैं उसके शत्रुओं को नष्ट कर दूंगा 24मेरी सच्चाई तथा मेरा करुणा-प्रेम उस पर बना रहेगा, 25मैं उसे समुद्र पर अधिकार दूंगा, 26वह मुझे संबोधित करेगा, ‘आप मेरे पिता हैं, 27मैं उसे अपने प्रथमजात का पद भी प्रदान करूंगा, 28उसके प्रति मैं अपना करुणा-प्रेम सदा-सर्वदा बनाए रखूंगा, 29मैं उसके वंश को सदैव सुस्थापित रखूंगा, 30“यदि उसकी संतान मेरी व्यवस्था का परित्याग कर देती है 31यदि वे मेरी विधियों को भंग करते हैं 32तो मैं उनके अपराध का दंड उन्हें लाठी के प्रहार से 33किंतु मैं अपना करुणा-प्रेम उसके प्रति कभी कम न होने दूंगा 34मैं अपनी वाचा भंग नहीं करूंगा 35एक ही बार मैंने सदा-सर्वदा के लिए अपनी पवित्रता की शपथ खाई है, 36उसका वंश सदा-सर्वदा अटल बना रहेगा 37यह आकाश में विश्वासयोग्य साक्ष्य होकर, 38किंतु आप अपने अभिषिक्त से अत्यंत उदास हो गए, 39आपने अपने सेवक से की गई वाचा की उपेक्षा की है; 40आपने उसकी समस्त दीवारें तोड़ उन्हें ध्वस्त कर दिया 41आते जाते समस्त लोग उसे लूटते चले गए; 42आपने उसके शत्रुओं का दायां हाथ सशक्त कर दिया; 43उसकी तलवार की धार आपने समाप्‍त कर दी 44आपने उसके वैभव को समाप्‍त कर दिया 45आपने उसकी युवावस्था के दिन घटा दिए हैं; 46और कब तक, याहवेह? क्या आपने स्वयं को सदा के लिए छिपा लिया है? 47मेरे जीवन की क्षणभंगुरता का स्मरण कीजिए, 48ऐसा कौन सा मनुष्य है जो सदा जीवित रहे, और मृत्यु को न देखे? 49प्रभु, अब आपका वह करुणा-प्रेम कहां गया, 50प्रभु, स्मरण कीजिए, कितना अपमान हुआ है आपके सेवक का, 51याहवेह, ये सभी अपमान, जो मेरे शत्रु मुझ पर करते रहे, 52याहवेह का स्तवन सदा-सर्वदा होता रहे!

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