Psalmi 39
1मैंने कहा “मैं अपनी राह की निगरानी करूँगा, 2मैं गूंगा बनकर ख़ामोश रहा, 3मेरा दिल अन्दर ही अन्दर जल रहा था। 4“ऐ ख़ुदावन्द! ऐसा कर कि मैं अपने अंजाम से वाकिफ़ हो जाऊँ, 5देख, तूने मेरी उम्र बालिश्त भर की रख्खी है, 6दर हक़ीकत इंसान साये की तरह चलता फिरता है; 7“ऐ ख़ुदावन्द! अब मैं किस बात के लिए ठहरा हूँ? 8मुझ को मेरी सब ख़ताओं से रिहाई दे। 9मैं गूंगा बना, 10मुझ से अपनी बला दूर कर दे; 11जब तू इंसान को बदी पर मलामत करके तम्बीह करता है; 12“ऐ ख़ुदावन्द! मेरी दुआ सुन और मेरी फ़रियाद पर कान लगा; 13आह! मुझ से नज़र हटा ले ताकि ताज़ा दम हो जाऊँ,