भजन संहिता 64
1हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दुहाई दूँ, तब मेरी सुन; 2कुकर्मियों की गोष्ठी से, 3उन्होंने अपनी जीभ को तलवार के समान तेज किया है, 4ताकि छिपकर खरे मनुष्य को मारें; 5वे बुरे काम करने को हियाव बाँधते हैं; 6वे कुटिलता की युक्ति निकालते हैं; 7परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा; 64:7 परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा: मनुष्यों पर तीर चलाने का उनका उद्देश्य है परन्तु इससे पहले कि वे सक्षम हों परमेश्वर उन पर अपने तीर चलाएगा। 8वे अपने ही वचनों के कारण ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे; 9तब सारे लोग डर जाएँगे; 64:9 तब सारे लोग डर जाएँगे: दुष्ट को जब न्याय समेत दण्ड मिलेगा तब सब मनुष्य परमेश्वर का आदर करना सीख लेंगे और ऐसे सामर्थी परमेश्वर का भय मानेंगे। 10धर्मी तो यहोवा के कारण आनन्दित होकर उसका शरणागत होगा,