URD Psalm Luku 58

Psalm 58

URD · Vertaa · Audio

1 बुज़ुर्गों! क्या तुम दर हक़ीक़त रास्तगोई करते हो? 2बल्कि तुम तो दिल ही दिल में शरारत करते हो; 3शरीर पैदाइश ही से कजरवी इख़्तियार करते हैं; 4उनका ज़हर साँप का सा ज़हर है; 5जो मन्तर पढ़ने वालों की आवाज़ ही नहीं सुनता, 6ऐ ख़ुदा! तू उनके दाँत उनके मुँह में तोड़ दे, 7वह घुलकर बहते पानी की तरह हो जाएँ जब वह अपने तीर चलाए, 8वह ऐसे हो जाएँ जैसे घोंघा, जो गल कर फ़ना हो जाता है; 9इससे पहले कि तुम्हारी हड्डियों को काँटों की आंच लगे 10सादिक़ इन्तक़ाम को देखकर खु़श होगा; 11तब लोग कहेंगे, यक़ीनन सादिक़ के लिए अज्र है;

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