1मुबारक है हर एक जो ख़ुदावन्द से डरता,2तू अपने हाथों की कमाई खाएगा;3तेरी बीवी तेरे घर के अन्दर मेवादार ताक की तरह होगी,4देखो! ऐसी बरकत उसी आदमी को मिलेगी,5ख़ुदावन्द सिय्यून में से तुझ को बरकत दे,6बल्कि तू अपने बच्चों के बच्चे देखे।
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