URD Song of Solomon Chapter 4

Song of Solomon 4

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1ेख, तू ख़ूबसूरत है ऐ मेरी प्यारी! 2तेरे दाँत भेड़ों के ग़ल्ले की तरह हैं, 3तेरे होंठ किर्मिज़ी डोरे हैं, 4तेरी गर्दन दाऊद का बुर्ज है जो सिलाहख़ाने के लिए बना जिस पर हज़ार ढाल लटकाई गई हैं, 5तेरी दोनों छातियाँ दो तोअम आहू बच्चे हैं, 6जब तक दिन ढले और साया बढ़े, 7ऐ मेरी प्यारी, तू सरापा जमाल है; 8लुबनान से मेरे साथ, ऐ दुल्हन! 9ऐ मेरी प्यारी, मेरी ज़ोजा, तू ने मेरा दिल लूट लिया। 10ऐ मेरी प्यारी, मेरी ज़ौजा, तेरा 'इश्क क्या ख़ूब है। 11ऐ मेरी ज़ोजा, तेरे होटों से शहद टपकता है; 12मेरी प्यारी, मेरी ज़ोजा एक महफ़ूज़ बाग़ीचा है; 13तेरे बाग़ के पौधे लज़ीज़ मेवादार अनार हैं, 14जटामासी और ज़ा'फ़रान, 15तू बाग़ों में एक मम्बा', आब — ए — हयात का चश्मा, 16ऐ शिमाली हवा बेदार हो, ऐ दख्खिनी हवा चली आ!

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