HIN Psalm Chapter 50

Psalm 50

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1र्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा ने कहा है, 2सिय्योन से, जो परम सुन्दर है, 3हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, 4वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर के आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा: 50:4 ऊपर के आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा: कहने का अर्थ यह नहीं कि वह न्याय के लिए आकाशीय पिण्डों को एकत्र करेगा। 5“मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, 6और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा (सेला) (भज. 97:6, इब्रा. 12:23) 7“हे मेरी प्रजा, सुन, मैं बोलता हूँ, 8मैं तुझ पर तेरे बलियों के विषय दोष नहीं लगाता, 9मैं न तो तेरे घर से बैल 10क्योंकि वन के सारे जीव-जन्तु 11पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूँ, 12“यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता; जो कुछ उसमें है वह मेरा है। 50:12 जो कुछ उसमें है वह मेरा है: जो कुछ संसार में है, वह सब जो उसमें विद्यमान है। सब कुछ उसके प्रयोजना के अधीन है।(प्रेरि. 17:25, 1 कुरि. 10:26) 13क्या मैं बैल का माँस खाऊँ, 14परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा, (इब्रा. 13:15, सभो. 5:4,5) 15और संकट के दिन मुझे पुकार; 16परन्तु दुष्ट से परमेश्वर कहता है: 17तू तो शिक्षा से बैर करता, 18जब तूने चोर को देखा, तब उसकी संगति से प्रसन्न हुआ; 19“तूने अपना मुँह बुराई करने के लिये खोला, 20तू बैठा हुआ अपने भाई के विरुद्ध बोलता; 21यह काम तूने किया, और मैं चुप रहा; 22“हे परमेश्वर को भूलनेवालो यह बात भली भाँति समझ लो, 50:22 हे परमेश्वर को भूलनेवालो: यद्यपि तुम मुँह से उसकी आराधना करते हो, सच तो यह है कि तुम उसे भूल चुके हो, तुम परमेश्वर के प्रमाणिक स्वभाव को भूल चुके हो। 23धन्यवाद के बलिदान का चढ़ानेवाला मेरी महिमा करता है; (इब्रा. 13:15)

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