HCV Mezmurlar Bölüm 31

Mezmurlar 31

HCV · Karşılaştır · Ses

1ाहवेह, मैंने आप में ही शरण ली है; 2मेरी पुकार सुनकर, 3इसलिये कि आप मेरी चट्टान और मेरा गढ़ हैं, 4मुझे उस जाल से बचा लीजिए जो मेरे लिए बिछाया गया है, 5अपनी आत्मा मैं आपके हाथों में सौंप रहा हूं; 6मुझे घृणा है व्यर्थ प्रतिमाओं के उपासकों से; 7मैं हर्षित होकर आपके करुणा-प्रेम में उल्‍लसित होऊंगा, 31:7 करुणा-प्रेम ख़ेसेद इस हिब्री शब्द का अर्थ में अनुग्रह, दया, प्रेम, करुणा ये शामिल हैं 8आपने मुझे शत्रु के हाथों में नहीं सौंपा . 31:8 अर्थात् “मुझे स्वतंत्र चलने फिरने की स्थिति प्रदान की” 9याहवेह, मुझ पर अनुग्रह कीजिए, मैं इस समय संकट में हूं; 10वेदना में मेरा जीवन समाप्‍त हुआ जा रहा है; 11विरोधियों के कारण, 12उन्होंने मुझे ऐसे भुला दिया है मानो मैं एक मृत पुरुष हूं; 13अनेकों का फुसफुस करना मैं सुन रहा हूं; 14किंतु याहवेह, मैंने आप पर भरोसा रखा है; 15मेरा जीवन आपके ही हाथों में है; 16अपने मुखमंडल का प्रकाश अपने सेवक पर चमकाईए; 17याहवेह, मुझे लज्जित न होना पड़े, 18उनके झूठ भाषी ओंठ मूक हो जाएं, 19कैसी महान है आपकी भलाई, 20अपनी उपस्थिति के आश्रय-स्थल में आप उन्हें 21स्तुत्य हैं, याहवेह! 22घबराहट में मैं कह उठा था, 23याहवेह के सभी भक्तो, उनसे प्रेम करो! 24तुम सभी, जिन्होंने याहवेह पर भरोसा रखा है,

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