HIN Song of Solomon Sura 3

Song of Solomon 3

HIN · Linganisha · Sauti

1ात के समय मैं अपने पलंग पर अपने प्राणप्रिय को ढूँढ़ती रही; (यशा. 3:1) 2“मैंने कहा, मैं अब उठकर नगर में, 3जो पहरुए नगर में घूमते थे, वे मुझे मिले, 3:3 नगर: वधू के घर का नगर, सम्भवतः शूनेम। 4मुझ को उनके पास से आगे बढ़े थोड़े ही देर हुई थी 5हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों वधू 6यह क्या है जो धुएँ के खम्भे के समान, 7देखो, यह सुलैमान की पालकी है! 8वे सब के सब तलवार बाँधनेवाले और युद्ध विद्या में निपुण हैं। 9सुलैमान राजा ने अपने लिये लबानोन के काठ की एक बड़ी पालकी बनवा ली। 10उसने उसके खम्भे चाँदी के, 11हे सिय्योन की पुत्रियों निकलकर सुलैमान राजा पर दृष्टि डालो,

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