Pjesma nad pjesmama 4
1कितनी सुंदर हो तुम मेरी प्रिया! 2तुम्हारे दांत अभी-अभी ऊन कतरे हुए भेड़ों के समान हैं, 3तुम्हारे ओंठ लाल रंग की डोरी के समान हैं; 4दावीद द्वारा बनाए गए मीनारों के समान है तुम्हारी गर्दन, 5तुम्हारी दोनों छातियां हिरणी के दो बच्चों के समान हैं, 6शाम होने तक 7मेरी प्रियतमा, तुम सर्वांग सुंदरी हो; 8मेरी दुल्हिन, मेरे साथ लबानोन से आ जाओ, 9मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, तुमने तो मेरी हृदय गति तेज कर दी है; 10मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, कैसा मनोहर है तुम्हारा प्रेम! 11मेरी दुल्हिन, तुम्हारे ओंठ मधु टपकाते हैं; 12मेरी बहन, मेरी दुल्हिन एक गुप्त निजी बगीचा है; 13तुम तो अनार के पेड़ों की बारी हो, जिसमें सबसे अच्छे फल लगे हुए हैं 14जटामांसी एवं केसर, 15तुम तो बगीचे के बीच का सोता हो, 16उत्तरी वायु, जागो,